हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में तनाव, चिंता, अनिद्रा और भावनात्मक थकान आम बात हो गई है। ऑफिस का दबाव, सोशल मीडिया की तुलना, पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ और भविष्य की अनिश्चितता मन को लगातार व्यस्त रखती हैं। ऐसे में योग और ध्यान सिर्फ़ आध्यात्मिक अभ्यास नहीं रह गए हैं। वे आधुनिक जीवन की ज़रूरत बन चुके हैं।
मन अशांत क्यों होता है?
हमारा मन हर समय या तो बीते हुए कल में उलझा रहता है या आने वाले कल की चिंता में। वर्तमान में रहना हम भूल जाते हैं। योग शास्त्र इसे "चित्त की वृत्तियों" का शोर कहता है। जब यह शोर कम होता है, तब मन स्वाभाविक रूप से शांत होने लगता है।
रोज़ के 15 मिनट, जो जीवन बदल सकते हैं
1. प्राणायाम (5 मिनट)
अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद करते हैं। धीमी और गहरी साँस लेने से मन भी धीरे-धीरे स्थिर होता है।
2. सरल योगासन (5 मिनट)
ताड़ासन, वृक्षासन, मार्जारी आसन और बालासन शरीर की जकड़न खोलते हैं। लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने वालों के लिए ये विशेष रूप से उपयोगी हैं।
3. ध्यान (5 मिनट)
आराम से बैठकर आँखें बंद करें और केवल अपनी साँस पर ध्यान दें। विचार आएँ तो उन्हें रोकने की कोशिश न करें। बस उन्हें आते-जाते देखें। शुरुआत में मन भटकेगा, पर यही अभ्यास की शुरुआत है।
अच्छी नींद के लिए सुझाव
- सोने से एक घंटा पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाएँ।
- रात को हल्का भोजन करें।
- सोने से पहले 5 मिनट लंबी साँसों का अभ्यास करें।
दिनचर्या में छोटे बदलाव
सुबह उठते ही फ़ोन देखने के बजाय कुछ मिनट शांत बैठें। दिन में एक बार कृतज्ञता का भाव रखें, यानी जो कुछ आपके पास है उसके लिए धन्यवाद कहें। यह आदत सोच को सकारात्मक बनाती है।
एक संतुलित दृष्टिकोण
योग और ध्यान मन को मज़बूत बनाने के प्रभावी साधन हैं, पर यदि उदासी, घबराहट या अनिद्रा लंबे समय तक बनी रहे, तो किसी योग्य डॉक्टर या मनोचिकित्सक से सलाह लेना भी उतना ही ज़रूरी है। मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, समझदारी है।
अगर आप ध्यान और योग को सही मार्गदर्शन में सीखना चाहते हैं, तो सांई किरण इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेज में शालिनी मेहता जी के अनुभव से आप योग, मेडिटेशन और जीवन-संतुलन के सही तरीके सीख सकते हैं। आज ही अपनी शांति की यात्रा शुरू करें।