ISO Certified Institute

Blog Detail

Navratri Mein Vastu Aur Dhyan: Ghar Mein Sakaratmak Urja Lane Ki 9 Din Ki Yojana

Home Blog Navratri Mein Vastu Aur Dhyan: Ghar Mein...
Navratri Mein Vastu Aur Dhyan: Ghar Mein Sakaratmak Urja Lane Ki 9 Din Ki Yojana
October 7, 2026 Navratri,Vastu & Meditation

Navratri Mein Vastu Aur Dhyan: Ghar Mein Sakaratmak Urja Lane Ki 9 Din Ki Yojana

त्योहारों के दिनों में लोग घर की सफाई और सजावट पर विशेष ध्यान देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की ऊर्जा का सीधा असर हमारे मन, स्वास्थ्य और संबंधों पर पड़ता है। नवरात्रि में यदि वास्तु के सरल नियमों को ध्यान और योग के साथ जोड़ लिया जाए, तो घर में शांति और सकारात्मकता का वातावरण बनता है। यहाँ नौ दिनों की एक व्यावहारिक योजना दी गई है।

दिन 1 से 3: शुद्धि और स्थान की तैयारी

नवरात्रि से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। टूटा-फूटा सामान, बंद घड़ियाँ और बेकार कागज़ हटा दें, क्योंकि वास्तु में अव्यवस्था को ऊर्जा के प्रवाह में बाधा माना जाता है। पूजा स्थान के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे उत्तम माना जाता है। कलश और देवी की प्रतिमा वहीं स्थापित करें और पूजा करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

मुख्य द्वार को स्वच्छ रखें। उस पर तोरण लगाएँ और शुभ चिह्न बनाएँ। प्रवेश द्वार के पास जूते-चप्पलों का ढेर न लगाएँ।

दिन 4 से 6: प्रकाश, सुगंध और ध्वनि

इन दिनों घर में प्रकाश और सुगंध का ध्यान रखें। सुबह और शाम दीपक जलाएँ। पूजा के समय कपूर या धूप का प्रयोग करें, जिससे वातावरण शुद्ध और मन शांत रहता है। घर में सुबह-शाम मंत्र, भजन या आरती की ध्वनि गूँजने दें। नियमित मंत्र-जाप एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है।

रसोई को भी साफ और व्यवस्थित रखें। वास्तु में रसोई का संबंध स्वास्थ्य और समृद्धि से जोड़ा जाता है, और नवरात्रि में सात्विक भोजन बनाते समय मन भी शांत रहना चाहिए।

दिन 7 से 9: ध्यान और आत्म-चिंतन

अंतिम तीन दिन साधना को गहरा करने के हैं। रोज़ सुबह 10 से 15 मिनट शांत बैठकर ध्यान करें। एक सरल विधि यह है:

1. सीधे बैठें और आँखें बंद करें।
2. श्वास को स्वाभाविक रूप से आते-जाते देखें।
3. मन में "ॐ दुं दुर्गायै नमः" का धीमे जाप करें।
4. विचार भटकें तो बिना खुद को दोष दिए ध्यान वापस श्वास पर लाएँ।

इसके साथ प्राणायाम, जैसे अनुलोम-विलोम, तनाव कम करने और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक है। उपवास के दौरान अधिक कठिन आसन न करें।

शरद पूर्णिमा तक जारी रखें

दशहरे के बाद शरद पूर्णिमा आती है, जो चंद्रमा की शीतल ऊर्जा और ध्यान के लिए उपयुक्त मानी जाती है। नवरात्रि में बनी दिनचर्या को इसके बाद भी जारी रखें। सुबह जल्दी उठना, थोड़ा ध्यान और घर की स्वच्छता ही आगे चलकर वास्तविक परिवर्तन लाते हैं।

याद रखें, वास्तु और ध्यान का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित बनाना है। यदि आपके घर या ऑफिस में कोई विशेष वास्तु समस्या है, तो किसी अनुभवी वास्तु सलाहकार से मार्गदर्शन लें। शुभ नवरात्रि!

 

About the Author

Dr Shalini Mehta

Dr. Shalini Mehta

Vedic Sciences Expert

Founder of Sai Kiran Institute with 30+ years of experience in Astrology, Vastu, Numerology and Palmistry.

Quick Links

Our Courses Our Books Gallery Contact Us

Start Your Vedic Journey Today

Join 1 Lakh+ students from 15+ countries who have transformed their lives.

Talk to a Counsellor WhatsApp