ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार हमारे जीवन में होने वाली घटनाएं हमारे ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती हैं। लेकिन हमें यह नही पता चल पाता कि हमारे ग्रह हमसे नाराज क्यों है, और कैसे हम ग्रहो की स्थिति अपने जीवन में सुधार सकते है। वैसे तो आप ग्रह शांति की पूजा कराकर ग्रहो की स्थिति सही कर सकते है, लेकिन आपके रोजमर्रा के कुछ ऐसे काम है जो ग्रहो को दोबारा नाराज कर देते है। इसलिए रोज की दिनचर्या मे कुछ छोटे नियम बनाकर आप अपने ग्रहो को खुश रख सकते है। 

सूर्य ग्रह के कमजोर होना

सूर्य आत्मसम्मान, लीडरशिप और पिता का रोल प्ले करते है। देर तक सोना, आलस्य करना, अपने से बड़ों का अपमान करना और बहुत ज्यादा घमंड रखना सूर्य को कमजोर करता है, और जब सूर्य नाराज होता है, तो व्यक्ति के मान-सम्मान में कमी आने लगती है, आपके सरकारी कामों में रुकावट और कांफिडेंट में गिरावट का सामना करना पड़ता है।

चंद्रमा क्यों होते है नाराज

चंद्रमा मन, इमोशंस और मातृत्व का रूप है। पानी की फिजूलखर्जी करना, महिलाओं का अपमान करना, और मन में किसी के लिए भी निगेटिव सोच रखना आपके चंद्रमा को कमजोर कर देता है। इससे आपका Mental Peace, अनिद्रा और इमोशनल बैलेंस डगमगा सकता है।

मंगल ग्रह के बिगड़ने का कारण

मंगल एनर्जी, पॉवर और खून को दर्शाता है। बहुत ज्यादा गुस्सा करना, झगड़े करना, दूसरों को नुकसान पहुंचाने की भावना रखना या फ्रॉड करना मंगल को बिगाड़ सकता है। मंगल के बिगड़ने से दुर्घटनाएं, चोट, और कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं।

बुध ग्रह के अशुभ होने के कारण

बुध बुद्धि, वाणी और बिजनेस का स्त्रोत है। गलत शब्दों का यूज करना, झूठ बोलना, बड़ों के साथ बुरा व्यवहार करना और बुरी संगति में रहना बुध को कमजोर कर सकता है। इससे बिजनेस में नुकसान, पढ़ाई में रूकावट और धन की समस्या हो सकती है।

गुरु ग्रह होता है नाराज

गुरु ज्ञान, धर्म और मार्गदर्शन को दिखाता है। ज्ञान का घमंड करना, गुरुजन का अपमान करना और गलत रास्ते अपनाना गुरु को अशुभ बना देता है। इससे एजुकेशन, विवाह और करियर में रुकावटें आती हैं।

शुक्र ग्रह के बिगड़ने के कारण

शुक्र प्रेम, सुख-सुविधा और वैवाहिक जीवन को होस्ट करता है। महिलाओं का अपमान, महिलाओं से व्यभिचार करना शुक्र को कमजोर करता है। शुक्र नाराज होने पर वैवाहिक जीवन में तनाव और धन की समस्याएं बढ़ सकती हैं।

शनि ग्रह क्यों होते है नाराज

शनि के नाराज होने से आपके जीवन में उथल-पुथल मच जाती है। शनि का व्यवहार शिक्षक जैसा है। शनि कर्म, न्याय और मेहनत को देखते है। मेहनत से बचना, गरीबों या जरूरतमंदों का बेइज्जती करना और अनुशासनहीनता अपनाना। यह सब चीजे शनिदेव को अप्रिय है, इससे शनिदेव आपको तुरंत नुकसान पहुंचा सकते है। शनि के खराब होने से बनते काम बिगड़ जाते है, संघर्ष बढ़ जाता है, और पैसा खत्म हो जाता हैं।

राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव

राहु छल, भ्रम और लालच का दर्शाता है। पीठ पीछे किसी की बुराई करना, अपने दोस्त या परिवार को धोखा देना और अत्यधिक लालच राहु को एक्टिव करता है। केतु नाराज होते है जब ज्यादा मोह, किसी के लिए निगेटिव बातें फैलाना और अपनी दुखों को बढ़ा-चढ़ाकर बताना आपके केतु को अशुभ बना देता है।


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