हमारी सनातन संस्कृति में बड़ों के चरण स्पर्श करने को आशीर्वाद या शुभ फल प्राप्ति में सहायक माना गया है। रामायण से लेकर हर पौराणिक ग्रंथों में इसकी महत्ता को दर्शाया गया है। खुद से बड़े लोगों के सामने झुकने से अंदर का अहंकार कम होता है और हमारे अंदर विनम्रता आती है। मान्यता है कि घर से बाहर जाते वक्त बड़े-बुजुर्ग के पैरों को छूने से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है जो हमारे आत्मविश्वास में वृद्धि करती है।
पैर छूने करने के सही रूल्स
समय के साथ लोगों के चरण स्पर्श करने के तरीके में बदलाव आया है और आज ये महज एक औपचारिकता मात्र बनकर रह गया है। हमारे धार्मिक मान्यताओं की मानें तो चरण स्पर्श करते समय मन में श्रद्धा और आदर का भाव होना चाहिए। औपचारिकता के लिए चरण छूने से हमें कोई लाभ नहीं होता। दोनों हाथों से झुककर चरण छूना शुभ फल की प्राप्ति दिलाता है। सुबह उठते और रात को सोते वक्त घर के बड़े-बुजुर्गों का चरण स्पर्श करना विशेष लाभकारी माना गया है।
कब नहीं छूने चाहिए पैर ?
- हिन्दू धर्म में कुछ ऐसी परिस्थितियाँ भी होती हैं जब हमें चरण स्पर्श से बचना चाहिए।
- मंदिर के अंदर किसी व्यक्ति का चरण स्पर्श करने से बचना चाहिए।
- पूजा-पाठ, जप या ध्यान में लीन व्यक्ति के चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।
- कोई व्यक्ति अगर सो रहा है तो उसके चरण नहीं छूने चाहिए।
- किसी के अंतिम संस्कार से लौटे व्यक्ति का चरण शीघ्र स्पर्श नहीं करना चाहिए।
- यदि किसी बुजुर्ग का स्वास्थ्य बहुत खराब हो तो हमें उस वक्त उनके चरण नहीं छूने चाहिए।
- संध्या समय या अंधेरे में भी चरण स्पर्श करना विशेष फलदायक नहीं माना जाता।
पैर छूने का महत्व
चरण स्पर्श करना हिंदुओं की केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि ये हमारे संस्कारों से हमें रूबरू करता है। ऐसा करने से हमारे अंदर का अहंकार कम होता है। रोज सुबह उठते ही बड़ों के पैर छूने से हमारा अहंकार कम होता है और परिवार का माहौल सौहार्द्यपूर्ण बना रहता है। बड़े अगर सच्चे मन से आशीर्वाद देते हैं तो हमारे जीवन की अधिकतर बाधा यूँही दूर हो जाती है। इसलिए बड़ों का चरण स्पर्श करते वक्त हमारे मन में श्रद्धा, विनम्रता और सम्मान का भाव अवश्य होना चाहिए। यही भाव हमें हमारी परंपरा से जोड़ती है।