दिवाली से पहले हम घर की सफाई और सजावट में जुट जाते हैं। अगर यही तैयारी वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार की जाए, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इस बार दिवाली 8 नवंबर 2026 को है। धनतेरस से पहले ये आसान वास्तु उपाय अपना लें।
1. ईशान कोण को साफ और खुला रखें
उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहते हैं। यह दिशा पूजा और सकारात्मक ऊर्जा के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। यहां कचरा, भारी सामान या जूते-चप्पल न रखें। पूजा स्थल इसी दिशा में बनाएं तो बेहतर है।
2. मुख्य द्वार को आकर्षक बनाएं
वास्तु में मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश बिंदु माना गया है। दरवाज़े की अच्छी तरह सफाई करें और उसे अच्छी रोशनी वाला रखें। आम या अशोक के पत्तों का तोरण, स्वास्तिक और शुभ-लाभ के चिह्न लगाएं। नेमप्लेट साफ और पढ़ने योग्य हो।
3. लक्ष्मी पूजन की सही दिशा
पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति साफ चौकी पर स्थापित करें। गणेश जी को लक्ष्मी जी के बाईं ओर रखने की परंपरा है।
4. दीपक सही स्थान पर जलाएं
घी का दीपक पूजा स्थल पर और तेल के दीपक मुख्य द्वार, आंगन और छत पर रखें। घर के हर कोने में थोड़ी रोशनी रखें, क्योंकि अंधेरे कोने वास्तु में अच्छे नहीं माने जाते।
5. रंगों का सही चुनाव
सजावट और रंगोली में हल्के और शुभ रंग चुनें, जैसे पीला, सुनहरा, लाल, केसरिया और हरा। पूजा कक्ष में हल्का पीला या सफेद रंग शांति देता है। बहुत गहरे और भारी रंगों से बचें।
6. तिजोरी और धन स्थान की दिशा
तिजोरी या अलमारी को इस तरह रखें कि उसका द्वार उत्तर दिशा की ओर खुले। यह कुबेर की दिशा मानी गई है। तिजोरी में अव्यवस्था न रखें और उसे साफ रखें।
7. टूटी और बेकार चीज़ें हटाएं
बंद घड़ियां, टूटे शीशे, फटे कपड़े और खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान घर में ठहराव लाते हैं। दिवाली से पहले इन्हें हटा दें या दान कर दें। साफ और व्यवस्थित घर मन को भी हल्का रखता है।
एक ज़रूरी बात
हर घर की बनावट अलग होती है। इसलिए किसी एक उपाय को आँख मूंदकर अपनाने से बेहतर है कि आप अपने घर के नक्शे के अनुसार सही सलाह लें। वास्तु के नाम पर बिना ज़रूरत तोड़-फोड़ करवाने से भी बचें। ज़्यादातर समस्याओं में छोटे और आसान सुधार ही काफी होते हैं।
वास्तु शास्त्र सीखें
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इस दिवाली आपका घर रोशनी, प्रेम और समृद्धि से भरा रहे। शुभ दीपावली!