दिवाली रोशनी, खुशियों और नई शुरुआत का त्योहार है। इस साल दिवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। पांच दिन के इस पर्व की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी। 7 नवंबर को छोटी दिवाली और 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन होगा। इसके बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज मनाई जाएंगी। हर शहर का शुभ मुहूर्त थोड़ा अलग होता है, इसलिए पूजा से पहले अपने शहर का पंचांग ज़रूर देख लें।
दिवाली का ज्योतिषीय महत्व
वैदिक ज्योतिष के अनुसार दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या को आती है। इस रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता, इसलिए दीपक जलाकर अंधकार को दूर किया जाता है। प्रदोष काल में की गई लक्ष्मी-गणेश पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। माना जाता है कि इस समय देवी लक्ष्मी की कृपा से धन, सुख और सौभाग्य बढ़ता है। अमावस्या की ऊर्जा नई शुरुआत और पुरानी नकारात्मकता को छोड़ने का अवसर भी देती है।
धन-समृद्धि के लिए ज्योतिषीय उपाय
1. लक्ष्मी-गणेश की पूजा साथ करें। लक्ष्मी जी धन की देवी हैं और गणेश जी बुद्धि और विवेक के दाता। दोनों की साथ पूजा करने से धन आता भी है और टिकता भी है।
2. घर की सफाई पहले कर लें। मान्यता है कि लक्ष्मी जी स्वच्छ और प्रकाशित घर में ही आती हैं। टूटा सामान और बेकार चीज़ें घर से हटा दें।
3. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। घर के मुख्य द्वार पर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। रंगोली और तोरण भी लगाएं।
4. श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जाप करें। शांत मन से किया गया जाप आपकी एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
5. दान ज़रूर करें। ज्योतिष में दान को ग्रह दोष कम करने का श्रेष्ठ साधन माना गया है। ज़रूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या मिठाई दें।
6. अपनी कुंडली देखें। हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है। किसी के लिए इस समय करियर पर ध्यान देना ठीक रहता है, तो किसी के लिए निवेश पर। अपनी दशा और ग्रह स्थिति जानकर चलना ज़्यादा लाभदायक है।
दिवाली पर क्या न करें
- घर में झगड़ा या कटु वचन से बचें।
- पूजा के स्थान को गंदा या अंधेरा न छोड़ें।
- दिखावे में कर्ज़ लेकर खर्च न करें।
- पटाखों का सीमित प्रयोग करें, ताकि पर्यावरण और पशु-पक्षियों को परेशानी न हो।
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आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!