साल 2026 का यह दूसरा और अंतिम ग्रहण शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को लगने जा रहा है। खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण उसी दिन पड़ रहा है जिस दिन रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा — जिसकी वजह से बहनों और भाइयों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं इस खगोलीय घटना को।
चंद्र ग्रहण कब और किस प्रकार का है ?
यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) है, जिसमें चंद्रमा का लगभग 90% से अधिक भाग पृथ्वी की छाया (उपच्छाया) में समा जाएगा — जिस कारण यह दशक के सबसे गहरे आंशिक ग्रहणों में गिना जा रहा है। यह ग्रहण कुंभ राशि में घटित होगा।
ग्रहण का समय — भारतीय समयानुसार (IST)
- ग्रहण प्रारंभ: सुबह लगभग 6:53 – 6:54 बजे
- परमग्रास (चरम स्थिति): सुबह लगभग 9:43 बजे
- ग्रहण समाप्ति: दोपहर लगभग 12:32 बजे
क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
नहीं। जिस समय यह ग्रहण घटित हो रहा होगा, उस समय भारत में दिन का उजाला होगा और चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा। इसलिए यह ग्रहण भारत के किसी भी भाग से नहीं देखा जा सकेगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से अमेरिका, अटलांटिक क्षेत्र, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा।
क्या भारत में सूतक काल मान्य होगा?
सनातन परंपरा का स्पष्ट नियम है कि सूतक काल केवल वहीं लागू होता है जहां ग्रहण वास्तव में आंखों से दिखाई देता है। चंद्र ग्रहण में सामान्यतः सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है, लेकिन यह नियम भी दृश्यता की शर्त पर ही लागू होता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं है:
- भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा
- मंदिरों में पूजा-आरती सामान्य रूप से चलती रहेगी
- भोजन बनाने-खाने पर कोई पाबंदी नहीं
- गर्भवती महिलाओं के लिए कोई विशेष सावधानी आवश्यक नहीं
क्या इसका असर रक्षाबंधन की राखी बांधने पर पड़ेगा?
बिल्कुल नहीं। चूंकि सूतक काल भारत में लागू ही नहीं हो रहा, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त पूरी तरह सामान्य रूप से मनाया जा सकता है। बहनें बेझिझक अपने तय मुहूर्त में भाई को राखी बांध सकती हैं।
वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से महत्व
भले ही यह ग्रहण भारत में न दिखे, वैदिक ज्योतिष में ग्रहण को ग्रहों विशेषकर राहु-केतु की स्थिति से जुड़ी एक सूक्ष्म ऊर्जावान घटना माना जाता है। कुंभ राशि में लगने वाला यह ग्रहण खासतौर पर उन जातकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनकी कुंडली में कुंभ, सिंह या राहु-केतु से जुड़ी ग्रह-दशा सक्रिय है। यह समय आत्मनिरीक्षण, धैर्य बनाए रखने और जल्दबाजी में बड़े निर्णय न लेने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
इस दौरान क्या करें
- मन को शांत रखते हुए ध्यान या जप करें
- जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है
- यदि आपकी राशि पर ग्रहण का विशेष प्रभाव बताया गया हो, तो जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें
निष्कर्ष
28 अगस्त 2026 का यह चंद्र ग्रहण खगोलीय रूप से दुर्लभ जरूर है, लेकिन भारत में दिखाई न देने के कारण यहां न तो सूतक लागू होगा और न ही रक्षाबंधन के उत्सव पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा। फिर भी, यह जानना जरूरी है कि यह ग्रहण आपकी राशि और कुंडली पर ज्योतिषीय दृष्टि से क्या असर डाल सकता है।
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